Monday, April 4, 2011

मिलता है कोई ज़ख्म तो सी लेते हैं

मिलता  है  कोई  ज़ख्म  तो  सी  लेते  हैं
इस  वास्ते  कुछ  लोग  थोड़ी  सी   कभी  पी  लेते  हैं
हैरत  है  इस  दौर  में  कैसे  हम  जैसे  लोग
पीते  भी  नहीं  और  जी  लेते  हैं 

क्यूँ दोस्ती छोड़कर लोग करते हैं प्यार ??

बोलती  है  दोस्ती , चुप  रहता  है  प्यार .

हसती  है  दोस्ती , रुलाता  है  प्यार .
मिलाती   है  दोस्ती , जुदा  करता  है  प्यार .
फिर  भी   क्यूँ  दोस्ती  छोड़कर  लोग  करते  हैं  प्यार ??

Sunday, April 3, 2011

एक कॉल तो कर दिया करो

में  आपको  ये  तो  नहीं  कहता  की
में  आपको  कॉल करता  हूँ  तो  आप  भी  मुझे कॉल करो .
पर  मेरे  प्यारे  दोस्तों  तुम  जिन्दा  भी  हो
ये  बताने  के  लिए  तो  एक  कॉल कर  दिया  करो .

प्यार निभाने का वादा है हमारा

 
दिल  का  रिश्ता  है  हमारा
दिल  के  कोने  में  नाम  है  तुम्हारा
हर  याद  मैं  है  चेहरा  तुम्हारा
हम  साथ  नहीं  तो  क्या  हुआ
ज़िन्दगी  भर  प्यार  निभाने  का  वादा  है  हमारा  ....

जाने क्यों तुम्हारी कमी सी थी

वक़्त  गुज़रता  रहा  पर  सांसे  थमी  सी  थी ,
मुस्कुरा  रहे  थे  हम ,
पर  आँखों  में  नमी  सी  थी ,
साथ  हमारे  ये  जहाँ  था  सारा ,
पर  न  जाने  क्यों  तुम्हारी  कमी  सी  थी

सूरत से पहले उसके दिल को तो देखो

फूल  से  पहले  खुसबू  को  तो  देखो ,
करने  से  पहले  काम   को  तो  देखो ,
किसीके  रूप  में  दीवाना  ना  बनो ,
सूरत  से  पहले  उसके  दिल  को  तो  देखो .

Thursday, March 31, 2011

जिस किसीको भी चाहो वोह बेवफा हो जाता है

जिस  किसीको  भी  चाहो  वोह  बेवफा  हो  जाता  है 
सर  अगर  झुकाव  तो  सनम  खुदा  हो  जाता  है
जब  तलक  काम  आते  रहो  हमसफ़र  कहलाते  रहो 
काम  निकल  जाने  पर  हमसफ़र  कोई   दूसरा  हो  जाता  है

जब भी तुम पुकारोगे

जब  भी  तुम  पुकारोगे 
हम  दौड़े  चले  आयेंगे   
कफ़न  में  लिपटे  चिता  से  उठ  के चले  आयेंगे 
अगर  जल  गए  तो  कोई  गम  नही  दोस्त 
राख़  बनके  हम  उड़ते  चलाएंगे

मेरे इश्क में दर्द नहीं था

मेरे  इश्क  में  दर्द  नहीं  था  पर  दिल  मेरा  बे दर्द  नहीं  था  
होती  थी  मेरी  आँखों  से  नीर  की  बरसात 
पर  उनके  लिए  आंसू  और  पानी  में  फर्क  नहीं  था

उनका ठिकाना तो दिल में था

उनका  ठिकाना  तो  दिल  में  था 
हमारे  पर  उनसे  दो  क़दम  आया  ना गया
हमने  रो  कर  पूछा क्यों  तोड़  दिया  प्यार  का  वादा
उसने  हस  कर  कहा , बस  निभाया  ना  गया .

अब ये ज़ाहिर कैसे करून

अलफ़ाज़  नहीं  है  पास   मेरे  गम -ऍ-उल्फत  कैसे   बयान करून 
आप  ने  की  है  मुझसे  बेवफाई , ये  अब   ज़ाहिर  कैसे  करून 
हमने  तो  आप  से  मोहब्बत  करके  खुद   है,  भुला  दिया 
तेरे   बाद  हालत  कैसे  है  मेरी , अब  ये  ज़ाहिर  कैसे  करून

किसी के प्यार में गेहरी चोट खाई है

किसी  के  प्यार  में  गेहरी  चोट  खाई  है
वफ़ा  से  पहले  ही  बेवफाई   पाई  है 
लोग  तो  दुआ  मांगते  हैं  इस  हाल  में  मरने  की 
पर  हमने  उसकी  यादों  में  जीने  की  कसम  खाई  है


तन्हाई किसी का इंतज़ार नहीं करती

तन्हाई  किसी  का  इंतज़ार  नहीं  करती 
किस्मत  कभी  बेवफाई  नहीं  करती
उनसे  दूर  होने  का  असर  है  वरना
परछाई कभी  जिस्म  पर  वार  नहीं  करती .